चौधरी फारूक सलाउद्दीन ने एक कट्ठा जमीन उर्दू पुस्तकालय के लिए दिए दान 


सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) ब्रजेश भारती की रिपोर्ट :-


प्रखंड के पहाड़पुर बाजार स्थित मदरसा फैज कासिम पश्चिमी में राष्ट्रीय एकता में उर्दू की अहम भूमिका एक सेमिनार आयोजित की गई। 

इस मौके पर खगड़िया सांसद चौधरी महबूब अली केसर के बड़े भाई चौधरी फारुक सलाह उद्दीन ने कहा कि आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक उर्दू ने समाज को जोड़ने का काम किया है। उर्दू भाषा विशेषकर उर्दू शायरी दुनिया के कुछ लोकप्रिय भाषाओं में से एक है लेकिन आज हमारे बच्चे विरासत में मिली इस जुबान को भूलते जा रहे है। 


चौधरी फारुक सलाह उद्दीन ने  सिमरी बख्तियारपुर में लाइब्रेरी की जरूरत पर बल दिया और अपने तरफ से एक कट्ठा जमीन अपने दादा नवाब नजीरूल हसन उर्दू लाइब्रेरी रानी बाग को देने की पूर्व की घोषणा को दुहराते हुए कहा कि लाइब्रेरी से नई नस्ल को शिक्षा व शिक्षण का माहौल मिलेगा।

अलमुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर फाउंडेशन, सिमरी बख्तियारपुर द्वारा आयोजित बिहार उर्दू अकादमी पटना के सहयोग से आयोजित इस एक दिवसीय संगोष्ठी “राष्ट्रीय एकता में उर्दू की भूमिका” पर आए हुए वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किया ।


संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने भी राष्ट्रीय एकता में उर्दू की भूमिका पर बेबाक विचार रखे । इस से पूर्व संगोष्ठी का उद्घाटन तेलावत कुरान और नन्ही बच्चियों के द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय गीत “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा… के द्वारा हुआ । उर्दू दैनिक इंकलाब  पटना के  ब्योरो चीफ  प्रसिद्ध पत्रकार असफर फरीदी ने कहा कि उर्दू अलफाज हिन्दुस्तान की राष्ट्रीय एकता में अहम भूमिका निभाई हैं। उन्हों ने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में देने की अहमियत पर  जोर दिया। 

अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू सहरसा के अध्यक्ष शाहिद अली  की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी रविशंकर ने कहा कि उर्दू के विकास के लिए सरकार प्रतिबध है। उन्होंने जब एक उर्दू का प्रचा को पढ कर सुनाया तो लोगों ने प्रसन्नता से तालियां बजा कर उनके उर्दू भाषा सिखने का हौसला बढ़ाया। जिला शिक्षा पदाधिकारी तक़ी उद्दीन अहमद ने कहा कि उर्दू एवं हिन्दी एक दूसरे के पूरक है। उर्दू के विकास के लिए उर्दू समाज को आगे बढ कर उर्दू के विकास के लिए सरकारी प्रयासों को कामयाब बनाने के लिए मेहनत करनी होगी। उन्होंने कहा उर्दू के शिक्षक अगर अपनी जिम्मेदारी को समझें तो उर्दू के विकास में सबसे अहम भूमिका उनकी ही है। 


 कार्यक्रम के संयोजक एवं जिला अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू सहरसा के उपाध्यक्ष वजीह अहमद तसौवुर ने धन्यवाद ज्ञापन इस शेर के साथ कि ” यहां चेहरे नहीं इंसान पढे जाते हैं, मजहब नहीं ईमान पढे जाते हैं, यह देश इसलिए महान है दोस्तो!, यहां एक साथ गीता और कुरान पढे जाते हैं,” आये हुये अतिथियों का शुक्रिया अदा किया और चौधरी फारुक सलाह उद्दीन द्वारा पुस्तकालय के लिए भूमि प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया। 

प्रो0 डॉ मोहम्मद अबुल फ़ज़ल ने कार्यक्रम का संचालन एवं स्वागत भाषण मुफ्ती जिल्लुर रहमान कासमी ने पेश  किया।  इस अवसर पर मोहम्मद हस्सान, मिनहाज आलम,  मोजाहिर कासमी, मुमताज रहमानी, अबु होरेरा, जीशान आरिफ, तनवीर आलम, अकबर आलम, सालिक इमाम, अतीकुर्रहमान, तारिक, रिजवान आदि ने भी अपने वक्तव्य को रखे।


कार्यक्रम के अंत के बाद चौधरी मोहम्मद फारूक सलाह उद्दीन के हाथों “नवाब नजीरूल हसन उर्दू पुस्तकालय ” का रानीबाग में शिलान्यास किया गया जहां बडी़ संख्या में लोग उपस्थित थे।