किशोर कुमार मुन्ना ने प्रेस कांफ्रेंस कर सांसद, विधायक व सरकार पर जमकर बोला हमला

सहरसा/ शहर के बंगाली बाजार रेलवे ढाबा पर तीन बार शिलान्यास के बाद भी आज तक रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण नहीं होना सहरसा की जनता के साथ धोखा है। इस मामले में सांसद, विधायक और सरकार का उदासीन रवैया रहा है। ऐसे जनप्रतिनिधियों को भगवान भी कभी माफ नहीं करेगा।

उक्त बातें पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर कही। उन्होंने कहा कि जन दबाव के बाद जब-जब रेलवे ओवरब्रिज बनने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई तो तथाकथित विकास का दावा करने वाले प्रतिनिधि ने मिलकर जिला वासी को मूर्ख बनाकर ठगने का काम किया है। पिछले दिनों जब रेलवे ने अपनी जमीन में एनओसी देने से मना कर दिया तो इसमें विघ्न डालने वाले नेता सक्रिय हुए और श्रेय लेने की होड़ मची है। जैसे गर्भ में 9 माह पलने वाले बच्चे 3 महीना में ही पूरा स्वस्थ होकर धरती पर चमत्कार करने जा रहा है।

मधेपुरा के सांसद कह रहे हैं कि वे 1996 से रेलवे ओवरब्रिज के लिए प्रयासरत हैं। विधायक कह रहे हैं कि वह जब सरकार में मंत्री थे तो उनकी उपलब्धि है। हम जनता की ओर से सांसद से पूछना चाहते हैं कि वर्ष 1996 को आज 27 वर्ष हो गए और लगातार आप सांसद विधायक और जिला मंत्री रहते एक आरओबी नहीं बना सके तो यह कैसा विकास का दावा है।

स्थानीय विधायक मंत्री के रूप में एक पुल भी सहरसा को नहीं दे सके तो फिर ऐसी झूठी बयानबाजी क्यों? व्यापारियों को दिगभ्रमित करने के लिए नगर निगम चुनाव से पूर्व स्थानीय सांसद ने बैठक कर नक्शा बदलवाने का भरोसा नहीं दिया था क्या ? स्थानीय विधायक ने पूर्व में प्रेस के माध्यम से जनता को क्यों नहीं बताया था की रेलवे से रेलवे में ही आरओबी बनेगा।आनन-फानन में एक व्यापार संगठन चैम्बर आफ कॉमर्स बना। जिसका सचिव विधायक के भाई बने।

उनके माध्यम से रेल ओवर ब्रिज के कार्य को रुकवाने का कोई भी प्रयास छोड़ा गया क्या। सर्व विदित था की रेलवे एनओसी नहीं देगा। एनओसी नहीं मिलने बाद दो दिन में ही सांसद श्रेय लेने के लिये मुख्यमंत्री से मिलकर अति शीघ्र ओवर ब्रिज निर्माण का दावा करने लगे। सांसद और विधायक को पत्र देते रेलमंत्री एवं मुख्यमंत्री आरओबी निर्माण रोकने का श्रेय भी लेना चाहये।

क्या यह व्यापारियों के साथ बदले की भावना से किया जा रहा है?‌ क्या स्थानीय विधायक की चुप्पी जनता के साथ धोखा नहीं है ? माननीय सांसद और विधायक जी को बताना चाहिए कि आपको 27 वर्ष और 8 वर्ष क्रमशः मिले और कितना लंबा वक्त चाहिए।

इन 27 सालों में केंद्र में 14 साल एनडीए 13 साल महागठबंधन तथा राज्य में 15 साल एनडीए तथा 12 साल महागठबंधन की सरकार को पूरे हो गए, लेकिन आज तक इस रेलवे ओवर ब्रिज का मामला फाइलों में ही पड़ा रह गया। ऐसे में क्या आपको इस पद पर रहने का अधिकार है। आपने सहरसा की जनता के साथ अपराध किया है और इसके लिए आपको लोगों को माफी मांगनी चाहिए।

पुर्व विधायक ने कहा मैं शुरू से आरओबी निर्माण के पक्ष में था और सरकार से हमेशा ही मांग करता रहा हूं कि व्यापारियों को कम से कम नुकसान को देखते हुए अत्याधुनिक तकनीक के सहारे पीलर पर बिना आरई वाल का कम चौड़ाई में पुल का निर्माण हो। आज भी हमारी मुख्यमंत्री जी से यही मांग है कि अतिशीघ्र रेलवे ओवरब्रिज बने जिस से सहरसा को जाम की समस्या से छुटकारा मिल सके,साथ ही जिसने भी इसमें विघ्न डाला है उसके खिलाफ श्वेत पत्र जारी हो।

वैसे सहरसा की जनता को सब कुछ मालूम है। हम अभी माननीय सांसद और विधायक से आग्रह करेंगे कि जनता के सामने आकर कमिटमेंट करें कि इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कब शुरू होगा और कब तक बनकर तैयार होगा। क्योंकि यहां की जनता को उन्होंने एक दो साल नहीं पूरे 27 साल तक ठगने का काम किया है।

इस मौके पर त्रिभुवन प्रसाद सिंह, अधिवक्ता लुकमान अली, रोहित शाह, शंभू शाह, प्रो. नवनीत सिंह, डॉ सुरेंद्र झा, रविकांत द्विवेदी, अभिजीत आनंद, विजेंद्र यादव, रामदेव भगत, दिलीप सिंह, अमन सिंह, निखिल सिंह, रामविलास गुप्ता, नीरज कुमार सिंह, बबलू कुमार सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।‌