कठडुमर पंचायत के दह घाट पर ट्रेक्टर ट्राली को नाव पर चढ़ाने के दौरान हुआ हादसा

सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) पूर्वी एवं पश्चिमी तटबंध के अंदर बड़े पैमाने पर किसानों का पीला सोना कहा जाने वाला फसल बड़े पैमाने होती है। इस फसल को बाजार में ले जाने का एक मात्र साधन ट्रेक्टर है। उसे भी नाव से नदी पार करा बाजार लाया जाता है। जो काफी जोखिम भरा होता है और आए दिन दुर्घटना होते रहती है।

ताज़ा कुछ इस तरह का हादसा मंगलवार को देखने को मिला जब एक मक्का लदा ट्रेक्टर ट्राली को नाव पर चढ़ाने के दौरान ट्राली नदी किनारे पानी में पलट गया। गनीमत रही कि ट्रेक्टर का इंजन नहीं पलटा नहीं तो ट्रेक्टर ड्राइवर की जान जा सकती थी। ट्राली में करीब 100 बोरा यानि करीब 50 से 60 क्विंटल मक्का पानी में भींग खराब हो गया।

घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार बेलबाड़ा गांव के किसान रामचंद्र यादव अपने मक्के की फसल को ट्रेक्टर पर लाद उसे बेचने शहरबन्नी के रास्ते खगड़िया जा रहा था। बागमती नदी के दह घाट पर मक्का लदा ट्रेक्टर ट्राली सहित नाव पर चढ़ा रहा था। इसी दौरान ट्रेक्टर का इंजन नाव पर चढ़ गया लेकिन ट्राली नदी किनारे पानी में पलट गया।

घटना के बाद आसपास के लोग पहुंच इंजन नदी में ना पलटे बचाने में लग गए। इस दौरान पानी में मक्का का बोरा पुरी तरह बर्बाद हो गया। किसान को हजारों की क्षति हो गई।

कई लोगों ने घटना के बाद सरकार और राजनेताओं को कोसते हुए कहा कि आज हम लोग आजादी के 75 वर्ष बाद भी ऐसी जिंदगी जी रहे हैं जहां आवागमन के लिए एक अदद पुल नहीं है। आज भी नाव के सहारे हमलोग आवागमन करते हैं। यह बड़े शर्म की बात है। यहां बतातें चले कि तटबंध के अंदर पुल के अभाव में लोग नाव से नदी पार कर आवागमन करते हैं।