आज भी न्यायालय, कारा सहित कई ऑफिस की है दरकार
  • आज ही के दिन नवाब की इस नगरी को मिला था अनुमंडल का दर्जा

संपादक की कलम से : सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल की सूरत 30 साल बाद भी नहीं संवरी है। बुनियादी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। चलने के लिए ना तो अच्छी सड़कें है। ना ही जलजमाव से निजात दिलाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम की सुविधा है। शुद्ध पेयजल के लिए लोग बाजार में बिक रहे बोतलबंद पानी पर निर्भर है। रोजगार के अभाव में लोग परदेश पलायन कर बाहर कमाने जाने को मजबूर हैं। विभिन्न विभाग के कार्यालय सहित अधिकारी एवं कर्मचारी की कमी का दंश झेल रहे हैं।

नही हो रहा है आयोजन : सिमरी बख्तियारपुर का अनुमंडल स्थापना दिवस 22 सितंबर को मनाने की परंपरा शुरू हुई। लेकिन कोरोना की वजह से दो वर्षों से यह नहीं मनाया गया। इससे पूर्व 2019 में लोकसभा चुनाव के आदर्श आचार संहिता के कारण यह कार्यक्रम स्थगित रखा गया था। वही इस वर्ष भी आदर्श आचार संहिता के कारण कार्यक्रम नही मनाया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभा को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए लगातार इस साल मंच नहीं मिल पायेगा।

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वर्ष 1954 में मिला था प्रखंड का दर्जा : 24 फरवरी 1954 को सिमरी बख्तियारपुर को प्रखंड का दर्जा मिला था। वहीं 9 जुलाई 2012 को सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के दो पंचायत के 15 वार्डों को मिलाकर नगर पंचायत बना। वर्तमान में नगर पंचायत को नगर परिषद का दर्जा मिल गया है। अनुमंडल के तीन प्रखंड सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ एवं बनमा इटहरी है। वहीं सिमरी अनुमंडल के कोसी तटबंध के अंदर के इलाके के इतिहास पर नजर दौड़ाये तो सदियों से उपेक्षित इस इलाके की दुर्गम स्थिति को देखकर अकबर के कुशल वित्त मंत्री टोडरमल ने अधिकांश भू भाग को फरकिया क्षेत्र घोषित कर दिया था। दुर्गम क्षेत्र को देखते हुए फरकिया को कर लगाने से मुक्त कर दिया था। लेकिन तेजी से भागती तकनीकी दुनिया में कोसी तटबंध के अंदर के इलाके फरकिया का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। अनुमंडल मुख्यालय तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लिया जाता है। कोसी नदी पर एक अदद पुल की चिर प्रतिक्षित मांग है।

महत्वपूर्ण कार्यालय तक नहीं खुले : नवनिर्मित भवन में अनुमंडल कार्यालय चल रहा है। लेकिन स्थापना के 30 वर्ष बीतने के बावजूद भी सिमरी बख्तियारपुर में अनुमंडल न्यायालय, उप कोषागार, माप तोल कार्यालय, अनुमंडल शिक्षा कार्यालय, जेल सहित अन्य कार्यालय अभी तक नहीं खुल पाए है। जिसके कारण यहां के लोगों को अभी भी कई कार्यों के लिए सहरसा मुख्यालय जाना पड़ता है।

नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर

नगर की समस्या : नगर परिषद स्थित शर्मा चौक से डाकबंगला चौक तक सड़क निर्माण की आस अधूरी है। वही मुख्य बाजार में नाला तो बना दिया गया। लेकिन निकासी नही है। अतिक्रमण के कारण जाम की समस्या बनी रहती है। शुद्ध पेयजल आपूर्ति योजना के तहद पानी टंकी बनकर बनी लेकिन सभी घरों में शुद्ध जल नही पहुंच पाई। अनुमंडल अस्पताल में स्वीकृत पद के अनुसार चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी नहीं रहने के कारण स्थिति बदतर है। अनुमंडल में उच्च शिक्षा के लिए प्रस्तावित डिग्री कॉलेज नहीं बन सका है।

● बाढ़ से है अभिशप्त यह इलाका अनुमंडल के कोसी तटबंध के भीतर के इलाके कोसी के बाढ़ एवं कटाव के लिए अभिशप्त है। फरकिया जैसे दुर्गम इलाके का आवागमन सीधे अनुमंडल मुख्यालय तक पहुंचने का मार्ग भी प्रशस्त नहीं हो सका है। कोसी नदी के कटाव से सैकड़ों एकड़ में लगी फसल एवं मकान कोसी में कटकर विलीन हो रहे हैं।

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