बोले पप्पू यादव सत्ताधारी दल इन दोनों धाराओं का करते हैं गलत इस्तेमाल
  • व्यवहार न्यायालय में पेशी के लिए सहरसा पहुंचे जाप सुप्रीमो

सहरसा/भार्गव भारद्वाज : चुनाव आचार संहिता को चुनाव आयोग ने जबरदस्ती सत्ताधारी लोगों का हथियार बना दिया है सीओ, बीडीओ चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक विपक्षियों को तंग करने के लिए केस चला देते हैं। आचार संहिता जैसी चीजें जो सत्ताधारी दल दल का हथकंडा है वे जिसको चाहे उसको एक केश में फंसा देते है। इसका इस्तेमाल करने का इजाजत नहीं देनी चाहिए।

जिस तरह आंदोलन करने पर धारा 153 जो नॉन बेलेबल है। जो सरकारी काम में बाधा डालने के लिए किया जाता है। उसका भी गलत इस्तेमाल होता है। इसका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देना चाहिए। धारा 153 सरकारी कामकाज में दखल के लिए लगाया जाता है। इन चोरों को, नेताओं को, भ्रष्टाचारियों को घर लूटने, सब कुछ बुरे कर्म करने की इजाजत है। लेकिन इसके खिलाफ कोई बोलेगा तो धारा 153 लग जाएगा।

मतलब इस आईडियोलॉजी को मिटा देने की जरूरत है। सत्ताधारी दल निरंकुश हो जाता है। वे इसका गलत इस्तेमाल करते है। गलत लोगों के खिलाफ आप सड़क पर बैठे है, ट्रेन को रोके है उसके खिलाफ यह कानून इस्तेमाल होता है यह जो दो कानून है। आचार संहिता और आंदोलन के बाद धारा 153 लगा देना। इससे आवाज दबती है। लोकतंत्र कमजोर होता है।

अब कोई अच्छा लकीर खींची जाए। जिससे लोगों के भीतर डर रहे कि सरकारी संपत्ति की क्षति ना हो, कोई शांतिपूर्ण धरना दे रहा है, पटरी पर बैठा हुआ, ट्रेन आ गई है, तो आप ट्रेन को जलाए नहीं, उस पर पत्थर नहीं चलाए। आप जीने की राह को लूट चुके हैं तो, सब कुछ ठीक है। और हम जब अपने जीने के राइट को लेकर कहीं बैठते हैं तो उस पर धारा 153 लगा देते हैं। इसीलिए आचार संहिता और धारा 153 के खिलाफ हम बराबर बोलते हैं।

उक्त बातें पूर्व सांसद पप्पू यादव ने स्थानीय व्यवहार न्यायालय में पेशी के दौरान कहीं। उनके ऊपर बीते चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया गया था। जिनमें उनकी पेशी होनी थी। शुक्रवार को वे पेशी के लिए स्थानीय व्यवहार न्यायालय पहुंचे थे। जहां उनकी पेशी के बाद प्रेस वार्ता आयोजित कर उन्होंने उक्त दोनों धाराओं को अमिट करने या एक ऐसी लिखी खींचने की मांग रखी। जिससे सत्ताधारी दल को विरोधियों की आवाज दबाने की इजाजत नहीं मिल सके। उन पर झूठा मुकदमा नहीं दर्ज हो सके।

वही उन्होंने बंगाली बाजार रेल ओवरब्रिज निर्माण को लेकर भी गोलमोल बातें कहीं। उन्होंने कहा कि शहर का डेवलपमेंट को देखते हुए काम करना चाहिए। एनएच और रेलवे ने मिलकर ओवरब्रिज निर्माण के लिए बहुत पहले पैसा दे दिया है। लेकिन इसे लम्बा नहीं खींच सकते है। एनएच इस तरह से नहीं काम करें। कई सालों से बाजार में काम कर रहे व्यापारियों का ख्याल रखना चाहिए। जो पूंजी लगाकर इतने लंबे समय से छोटा-बड़ा बाजार करके अपने परिवार का जिंदगी को चला रहे है। उनका ख्याल रखेंगे ना। इसमें कहीं संसय की कोई बात नहीं है।