संतों का प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी

सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) ब्रजेश भारती : सहरसा जिला संतमत सत्संग का 58 वां दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का शुभारंभ गुरूवार को सिमरी बख्तियारपुर प्रखण्ड के रायपुरा पंचायत अंतर्गत बलहमपुर गांव में किया गया। इस अवसर पर भागलपुर सबोर महर्षि मेहीं आश्रम से आये कथावाचक स्वामी भागीरथ बाबा ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सत्संग अति आवश्यक है।

सत्संग के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ माना जाता है और सत्संग का लाभ संतों के सानिध्य में आने के बाद ही मिल पाता है। सत्संग ही मनुष्य को जीवन मरण से छुटकारा दिला सकता इसीलिए मनुष्य को अपने कर्मों के साथ साथ सत्संग से भी दूर रखना चाहिए। सत्संग और संत के सानिध्य में आकर बुरे लोग भी बुरे कार्यों से अपना मुंह मोड़कर अच्छे मार्ग की ओर चल पड़ते हैं जो काम पुलिस प्रशासन बल प्रयोग कर भी नहीं कर पाता है संत समाज उस काम को उसे अपनी अमृत वाणी से कर लेते हैं।

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कई उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा इतिहास गवाह है ऊंगली माल जैसे डाकू भी संत के सानिध्य में आकर महान संत बने हैं।स्वामी प्रमोद बाबा ने कहा कि संतों का काम जीवात्मा का कल्याण करना होता है।संत का अपमान करें या सम्मान करें वे हमेशा जीवात्मा के कल्याण के लिए काम करते हैं।संत का पद सबसे बड़ा है उससे बड़ा कोई पद नहीं है उन्हें संत की तुलना शीतल चंदन, चन्द्रमा से करते हुए कहा कि संत शीतल जल के समान है जो गंभीर से गंभीर आग को भी ठंडा कर देती है।स्वामी अरविंद बाबा, स्वामी शंकर बाबा ने कहा कि मनुष्य का सबसे पहला गुरु माता – पिता होते हैं।

सबसे अहम आध्यात्मिक गुरु होता है आध्यात्मिक गुरु संत समाज होता है। प्रवचन से पहले बिहार के विभिन्न जिले से आए संतों को और अतिथियों द्वारा गुरू महाराज के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर महेश्वर बाबा, अरविंद सिंह कुशवाहा, पवन राम, नारायण सिंह, हरदेव सिंह, निखिल सिंह, राजेंद्र यादव, महानंद यादव, नंद कुमार सिंह, विपिन कुमार, गणेश कुमार, सतनारायण सिंह, सोमन मेहता, राजकुमार सिंह, उमेश मेहता, शशि कुमार सहित अन्य मौजूद थे।