निवर्तमान विधायक व प्रदेश सचिव, आरजेडी प्रत्याशी के विरोध में है मैदान में डटे

संपादक की कलम से : खगड़िया लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा सीट पर तीसरे चरण में 7 नवंबर को मतदान होना है। नामांकन वापसी उपरांत 22 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक रहें हैं। जिनमें आरजेडी से यूसुफ सलाउद्दीन, वीआईपी से मुकेश सहनी, जाप से जफर आलम व निर्दलीय रितेश रंजन सहित अन्य शामिल हैं।

चौधरी यूसुफ सलाउद्दीन (फाइल फोटो)

यह सीट अभी से ही हॉट सीट में गिना जाने लगा है क्योंकि यहां से एनडीए गठबंधन के घटक दल वीआईपी पार्टी के सुप्रीमो मुकेश सहनी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आरजेडी गठबंधन से खगड़िया लोकसभा के लोजपा सांसद चौधरी महबूब अली केसर के पुत्र युसूफ सलाउद्दीन लोजपा छोड़ आरजेडी ज्वाइन कर प्रत्याशी बन चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

ये भी पढ़ें : पल-पल बदल रही सहरसा की राजनीति, दल बदल नेताओं ने चुनाव को बनाया रोचक

एनडीए व महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला अभी देखने को मिल रहा है। लेकिन आरजेडी के निवर्तमान विधायक जफर आलम एवं आरजेडी के प्रदेश सचिव रितेश रंजन बागी रूख़ अख्तियार कर एक जन अधिकार पार्टी के टिकट से तो दुसरा निर्दलीय प्रत्याशी बन आरजेडी प्रत्याशी के विरोध में मैदान में डट गए हैं।

निवर्तमान विधायक जफर आलम (फाइल फोटो)

हालांकि अंतिम समय में एनडीए गठबंधन के बागी जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष चन्द्र मणि को पार्टी मना कर नाम वापस करवा राहत की सांस ली है लेकिन आरजेडी के बागी दोनों प्रत्याशी गत उपचुनाव में पहली बार जलाए गए लालटेन की लौ को बुझाने के लिए दिन रात जनता के बीच पहुंच मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में अगर बागी यहां लालटेन की लौ बुझा दे तो कोई हैरत की बात नहीं होगी।

ये भी पढ़ें : फ्लैशबैक : जब नबाव खानदान की चौथी पीढी का राजनीति में हुई थी इन्ट्री

हालांकि गुरुवार को आरजेडी आलाकमान ने अपने निवर्तमान विधायक जफर आलम को पार्टी से छः वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है लेकिन अपने अल्पकाल में किए गए कार्यों को गिना निवर्तमान विधायक आरजेडी प्रत्याशी का खेल बिगाड़ने में जी तोड़ लगे हुए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि जनता 7 नवंबर को क्या फैसला करती है।

निर्दलीय प्रत्याशी नेता रितेश रंजन(फाइल फोटो)

अब थोड़ा 2015 की बात करें तो यहां से जदयू आरजेडी गठबंधन के प्रत्याशी वर्तमान मधेपुरा सांसद दिनेश चंद्र यादव ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने लोजपा प्रत्याशी वर्तमान में आरजेडी प्रत्याशी युसूफ सलाउद्दीन को मात दी थी। दिनेश चंद्र यादव को 78514 मत मिले थे वहीं युसूफ सलाउद्दीन को 40708 मत प्राप्त हुआ था वहीं निर्दलीय व वर्तमान में भी निर्दलीय प्रत्याशी रितेश रंजन को 9847 मत प्राप्त हुआ था।

ये भी पढ़ें : सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा : जेडीयू ने परंपरागत सीट गंवा दी

वहीं अगर बात ठीक एक वर्ष पहले हुए उपचुनाव की करें तो यह सीट पहली बार आरजेडी के खाते में गई थी। निवर्तमान विधायक जफर आलम ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जदयू के डॉ अरूण कुमार यादव को मात दी थी। जफर आलम को 71435 मत मिले थे वहीं अरूण यादव को 55927 मत प्राप्त हुआ था। वहीं वीआईपी पार्टी को 25225 मत प्राप्त हुआ था।

ब्रजेश की बात

इस बार के विधानसभा चुनाव में सब कुछ उलटा पुलटा नजर आ रहा है निवर्तमान विधायक जफर आलम का टिकट कट लोजपा से आरजेडी में आने वाले यूसुफ सलाउद्दीन को मिल गया। वहीं टिकट कटने से नाराज़ जफर आलम जाप का दामन थाम चुनावी मैदान में हैं। वहीं रितेश रंजन भी मैदान निर्दलीय मैदान में आ गए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि गत चुनाव में जो लालटेन जली व जलते रहती है कि बागी लौ बुझा देती है।

चलते ये भी देखें : तेजस्वी के बयान पर गुस्सा गए नीतीश बाबू…!