एक आधार कार्ड सुधार काउन्टर पर लगी रहती लोगों की भीड़, देखने वाला कोई नहीं

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सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना आधार आज देश सहित आमजीवन में अहम भूमिका निभा रहा है। आमजीवन में बिना आधार आप कुछ नहीं कर सकते हैं। बैंक से लेकर पहचान तक में आधार कार्ड मजबूत सबूत साबित हो रहा है। लेकिन इसमें त्रुटि लोगों को परेशानी बढ़ा कर रख दिया है।

आधार सुधार काउंटर लगी लोगों की भीड़

नाम के शब्दों से लेकर जन्म तिथि में गलती आम बात है। इस गलती के सुधार के लिए पहले कई सेंटर संचालित होते थे लोग वहां जाकर अपने आधार को सुधार लेते थे। लेकिन इसका फायदा कुछ गलत कार्यों के लिए होने लगा तो सरकार ने इस पर रोक लगाते हुए सुधार एवं नया कार्ड बनाने का काम अपने जिम्मे ले कर ब्लाक, अनुमंडल, जिला स्तर पर काउन्टर खोल शुरू कर दिया गया।

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यही से परेशानी शुरू हो गई। सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र तीनों प्रखंडों में ब्लाक मुख्यालय में एक एक काउंटर अपने अपने प्रखंड को झेलने के लिए खोला गया। नगर पंचायत एवं अनुमंडल मुख्यालय में एक एक काउंटर अलग से खोला गया। यानि पुरे अनुमंडल वासियों के लिए पांच काउंटर। नगर पंचायत व अनुमंडल कार्यालय का काउंटर कोविड के वजह से अभी बंद है।

सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के 22 पंचायत एवं एक नगर पंचायत का लोड सिर्फ एक काउंटर पर आ गया। यहां इतनी भीड़ उमड़ पड़ती है कि लोग कोरोना संक्रमण का डर भी छोड़ भीड़ लगा अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं नतीजा धक्का मुक्की, हो हंगामा, मारपीट आम बात हो गई है। उस पर से लिंक फेल, कर्मी की अनदेखी, कर्मी की कमी का तो जिक्र करना बेमानी होगी।

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हालांकि सिमरी बख्तियारपुर एसडीओ ने अनुमंडल कार्यालय का काउंटर भी प्रखंड मुख्यालय भवन में सिफ्ट करने का निर्देश दिया लेकिन अभी तक निर्देश पर अमल नहीं हुआ, शायद एसडीओ का भी निर्देश का भेल्यू अब नहीं रहा !

ऐसे भीड़ हमेशा रहता है जमा

वहीं बीडीओ स्तर से भीड़ को कम करने के लिए पंचायत बार दिन निर्धारित किया गया, यानि एक दिन एक या दो पंचायत के लोग अपना आधार सुधार करवा सकते हैं। अब यहां पर लोचा फंस जाता है। पूर्व तटबंध के अन्दर से लोग अपने नियत दिन पर आते हैं पता चलता है आज लिंक कई घंटों से नहीं है या फिर कर्मी लेट से आए या फिर जो कागजात जरूरी था वह नहीं है। उस दिन काम नहीं हुआ फिर अगले सप्ताह के लिए इंतजार किजिए।

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इन सब परेशानी का फायदा बिचौलिए एवं कर्मी भी खूब उठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि गरीब, अनपढ़, जल्दबाजी में काम करवाने वाले बिचौलिओं का सहारा लेकर पिछले दरवाजे (बेक डोर) से एक सौ से दो सौ रूपए में काम करवा चांदी काट रहे हैं। जनता पीस रही होती है। ठोस सबूत एवं अन्य कारणों से इस पर अधिकारी भी लगाम लगाने में कामयाब नही हो पाते। जिसका नतीजा लोग हलकान, परेशान होते चले आ रहे हैं।

लेख : ब्रजेश की बात