चचरी पुल से लाखों की आबादी को मिल रहा था लाभ, रिपेयरिंग की कि जा रही है कोशिश

सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) ब्रजेश भारती : कोशी दियारा वासियों के लिए बरसात एवं बाढ़ उपरांत आवागमन के लिए लाइफलाइन कहें जाने वाले पूर्व कोशी तटबंध के अन्दर कठडुमरधाट पर बनाए गए चचरी पुल फिलहाल बढ़ते नदी के पानी का दबाव की वजह से ध्वस्त हो गया है। हालांकि राहत भरी बात यह है कि कुशल कारीगरों द्वारा चचरी पुलिस को ठीक कर आवागमन लायक बनाने का काम किया जा रहा है।

कठडुम्मरघाट स्थित चचरी पुल

कोसी नदी घाट पर बने इस चचरी पुल के सहारे मोटरसाइकिल, साइकिल सवार एवं पैदल मुसाफिरों के लिए कोशी नदी को पार करना चंद मिनटों का खेल था। लोग रात दिन कभी भी चचरी पुल के सहारे अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए नदी के आर पार हुआ करता था। लेकिन जब बुधवार को चचरी पुल ध्वस्त हो गया तो लोगों में मायूसी छा गई ।

पूर्व सरपंच बेचू यादव की निगरानी में कारीगर लगे हुए हैं उम्मीद है कि यह आवागमन के लिए कुछ दिन और चल सकता है लेकिन जिस प्रकार नदी में लाल पानी उतर आया है यह आवागमन दस से पंद्रह दिन का मेहमान होगा। इतने दिन तक तो यहां के वासी आराम से आवागमन कर सकते हैं उसके बाद वही ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होगी।

ध्वस्त हुए चचरी पुल

अब थोड़ा जानकारी के लिए बता दें कि नदी में पानी उतरने के बाद यहां के लोग कोशी दियारा में आवागमन के लिए छोटे आकार में आ गए नदी पर चचरी का पुल बना आवागमन सुलभ कर लेते हैं यह करीब पांच से छः माह तक चलता है फिर पानी बढ़ने के साथ चचरी पुल खोल लिया जाता है बहुत बार दह भी जाता है।

चचरी पुल की जगह स्थाई पुल के लिए कई बार ग्रामीण आंदोलन चला चुके हैं एक बार जल सत्याग्रह आन्दोलन काफी चर्चा में रहा था उस वक्त लगा कि जल्द इस नदी पर स्थाई पुल निर्माण की स्वीकृति सरकार दे देगी लेकिन अभी तक यह सब फाइलों की शोभा बढ़ा रही है। अगर यहां पुल बन जाता है तो सीधे खगड़िया की दुरी कम तो होगा कि कोशी दियारा में विकास के नए आयाम भी गढ़े जा सकतें हैं।

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