22 सितंबर 1992 को मिला था तीन प्रखंडों को जोड़कर अनुमंडल का दर्जा

तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने बिहार के 112 वें अनुमंडल के रूप में किया था उद्घाटन

सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) से संपादक की कलम से विशेष रिपोर्ट : बिहार के सहरसा जिला का दुसरा अनुमंडल सिमरी बख्तियारपुर इसी माह की 22 तारिख को अपने स्थापना का 27 वर्षगांठ मनाने जा रहा है। अपने स्थापना के 27 वर्षों बाद भी ना तो यहां निजाम बदला ना ही यहां की तस्वीर ही बदली आज भी इस अनुमंडल क्षेत्र के लोगों को बुनियादी मूलभूत सुविधाओं का दंश झेलना पड़ रहा है। स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा, बेरोजगारी, प्रदेश पलायन सहित अन्य जरूरी समस्याएं मुंह बाए खड़ी है।

रोजगार के अभाव में लोग परदेश पलायन कर बाहर कमाने जाने को मजबूर हैं। विभिन्न विभाग के कार्यालय सहित अधिकारी एवं कर्मचारी की कमी का दंश झेल रहद है ऐसे में यह अनुमंडल 22 सितंबर 2019 को अपने स्थापना का 27 वां वर्षगांठ मनाने जा रहा है।

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क्या है इतिहास : 24 फरवरी 1954 को सिमरी बख्तियारपुर को प्रखंड का दर्जा मिला था। इसके बाद सलखुआ एवं बनमा ईटहरी को भी प्रखंड का दर्जा प्राप्त हुआ। तत्कालीन विधायक एवं वर्तमान मधेपुरा सांसद दिनेश चंद्र यादव के अथक प्रयास से 22 सितंबर 1992 को सिमरी बख्तियारपुर को अनुमंडल का दर्जा प्राप्त।

उस समय के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने 112 वें अनुमंडल के रुप में इसका उद्घाटन किया था। सलखुआ एवं बनमा ईटहरी को जोड़कर यह अनुमंडल बनाया गया था। उस समय लोगों को आस जगी की अब हमारे दिन बहुरेंगे लेकिन आज तक यह दिवा स्वप्न जैसा प्रतीत होता दिख रहा है।

9 जुलाई 2012 को सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के 24 पंचायतों में से दो पंचायत बख्तियारपुर उत्तरी एवं दक्षिणी को मिला कर 15 वार्डों का नगर पंचायत बनाया गया। एक बार फिर अनुमंडल बनाने के समय जो लोगों ने सपना देखा था उसी सपने को दोबारा देखते हुए नगर पंचायत की ओर विकास की आस लिए आंखें तैरने लगी।

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थोड़ा इस अनुमंडल क्षेत्र के पूर्व कोसी तटबंध के अंदर के इलाके के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो सदियों से उपेक्षित इस इलाके की दुर्गम स्थिति से आजीज होकर अकबर के कुशल वित्त मंत्री टोडरमल ने अधिकांश भू भाग को फरकिया क्षेत्र घोषित कर दिया था। दुर्गम क्षेत्र को देखते हुए फरकिया को कर लगाने से मुक्त कर दिया था लेकिन कोसी तटबंध के अंदर के इलाके फरकिया का अपेक्षित विकास आज तक नहीं हो पाया।

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आज भी यहां के लोगों को अनुमंडल मुख्यालय तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। कोसी नदी पर एक अदद पुल की चिर प्रतिक्षित मांग आज भी यहां के लोगों को डेंगराही जैसे 17 दिनों का अनशन को मजबूर करती है।

महत्वपूर्ण कार्यालय नहीं खुले : अनुमंडल निर्माण के बाद नवनिर्मित सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल कार्यालय का भव्य भवन में अनुमंडल कार्यालय चल रहा है। लेकिन अनुमंडल स्थापना के 27 वर्ष बीतने के बावजूद भी सिमरी बख्तियारपुर में अनुमंडल न्यायालय, उप कोषागार, माप तोल कार्यालय, अनुमंडल शिक्षा कार्यालय, जेल आदि सहित अन्य कार्यालय अभी तक नहीं खुल पाए है। जिसके कारण यहां के लोगों को अभी भी कई कार्यों के लिए सहरसा मुख्यालय जाना पड़ता है।

अनुमंडल में अधिकारी एवं कर्मी की कमी : अनुमंडल कार्यालय में निर्धारित पोस्ट के अनुसार अधिकारी एवं कर्मी की कमी है। जिससे अनुमंडल कार्य पर कुप्रभाव पड़ता है। अनुमंडल में वर्तमान में प्रधान लिपिक सहित 10 कर्मी कार्यरत हैं। वही अनुमंडल कार्यालय में कार्यपालक पदाधिकारी, अवर निर्वाचन पदाधिकारी, भूमि उप समाहर्ता, सहायक आपूर्ति पदाधिकारी आदि का पद रिक्त है। अनुमंडल में मानदेय पर 7 ऑपरेटर कार्यरत हैं।

नगर पंचायत की समस्याएं : सिमरी बख्तियारपुर नगर पंचायत मुख्य बाजार की जर्जर सड़कें एवं नाला की समस्या मुंह बाए खड़ी है। अतिक्रमण के कारण जाम की समस्या बनी रहती है। शुद्ध पेयजल आपूर्ति योजना के तहद पानी टंकी बनकर तैयार है। लेकिन संवेदक से लापरवाही के कारण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। संपूर्ण सिमरी बख्तियारपुर नगर पंचायत निवासियों के जल निकासी के कोई मास्टर प्लान अब तक नहीं बना है।

प्रस्तावित कार्य : हालांकि अनुमंडल के निर्माण के बाद यहां अनुमंडल स्तरीय भव्य अनुमंडल अस्पताल तो बना। लेकिन स्वीकृत पद के अनुसार चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी नहीं रहने के कारण अस्पताल बदहाल बना हुआ है। इसके अलावा नर्स ट्रेनिंग स्कूल, दिव्यांग भवन, प्रखंड कार्यालय आदि भवन निर्माण का कार्य प्रगति पर है।

शिक्षा : अनुमंडल में उच्च शिक्षा के लिए प्रस्तावित डिग्री कॉलेज के लिए भूमि का चयन का कार्य फाइनल नहीं हो सका है। सिमरी बख्तियारपुर नगर पंचायत मुख्य बाजार स्थित विद्यालय के मैदान में एक कला भवन का निर्माण किया गया है। लेकिन अब तक उसे विभाग को नहीं सौंपा गया है।

पानी, प्रदेश एवं पहरा : अनुमंडल के कोसी तटबंध के भीतर के इलाके कोसी के बाढ़ एवं कटाव के लिए अभिशप्त है। फरकिया जैसे दुर्गम इलाके का आवागमन सड़क मार्ग का सीधे अनुमंडल मुख्यालय सिमरी बख्तियारपुर तक पहुंचने का मार्ग भी प्रशस्त नहीं हो सका है। हालांकि कोसी तटबंध के अंदर के लोगों को बिजली सड़क सुविधाएं मिली है।

तटबंध के अंदर के निवासियों के आवागमन का साधन एकमात्र नाव के सहारे पर टिकी है। बाढ बरसात में नाव हादसा होने का भय बना रहता है। कोसी नदी के कटाव से सैकड़ों एकड़ में लगी फसल एवं ग्रामीणों के मकान कोसी में कटकर विलीन हो रहे हैं। नतीजा रोजी रोजगार के लिए लोग घर बार छोड़कर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, लुधियाना, हिमाचल प्रदेश पलायन कर जाते हैं।

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प्रतिदिन जनसेवा, जनसाधारण एवं पुरवइया से मजदूर पलायन करते हैं। कोसी इस दुर्गम क्षेत्र खगड़िया, दरभंगा, समस्तीपुर एवं बेगूसराय आदि जिलों की सीमा रहने के कारण अपराध कर्मियों की शरण स्थली बनती रही है। जिसके कारण अपराधों पर अंकुश लगाने पुलिस का पहरा लगा रहता हैं।