इस मां ने चार बेटी में तीन को इंजिनियर व एक को डॉक्टर बना रचा इतिहास

18 वर्ष पहले पति की मौत बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए नारी सशक्तिकरण पेश की मिसाल

सहरसा – कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों….! आधुनिक हिन्दी के कवि दुश्यन्त कुमार की इस पंति को चरितार्थ कर दिखाया है सहरसा वार्ड नं 35 सिमराहा रहने वाली एक बेसहारा मां ने।

18 वर्ष पहले पति का साथ छुट जाने के बाद भी नारी सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए हिम्मत नहीं हारी और पांच बच्चों में तीन बेटी को इंजीनियरिंग बना एक को मेडिकल में पास करवा यह साबित कर दिया कि हौसला हो तो कुछ भी संभव है।

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गत दिनों नीट के नतीजे घोषित होने के बाद इस परिवार की चौथी बेटी हेमलता ने ऑल इंडिया रैंक 3050 लाकर (ओबीसी रैंक 895) मेडिकल की परीक्षा पास की। हेमलता कोटा में रह कर मेडिकल की तैयारी कर रही थी। दुसरे प्रयास में ये सफलता पाई है।

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सोमवार को घर आने पर मां सहित परिजनों ने हेमलता को मिठाई खिलाकर भव्य स्वागत करते हुए उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

आईए आपको बताते हैं कि आखिर कौन है वह मां जिसने यह कारनामा कर दिखाया है मुलरूप से नवहट्टा प्रखंड के जोड़ी चन्द्रायण निवासी इंजिनियर स्व. सूर्य नारायण यादव का पुत्र स्व. सत्य नारायण यादव की पत्नी नीलम देवी।

2001 ट्रान्सप्लांट किडनी फेल करने की वजह से पति सत्य नारायण की मौत बाद चार पुत्री व एक पुत्र की की जिम्मेदारी नीलम देवी के कंधों पर आ गई। बतौर नीलम उसने पति की मौत उपरांत यह ठाना की पिता की कमी बच्चों पर नहीं आने देगी।

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पहली पुत्री कनक लता कुमारी को जब इंजिनियर बना कलकत्ता में जॉब दिला दी तो किसी ने सोचा नहीं था कि यह कारवां आगे भी जारी रहेगा। दुसरी पुत्री जब इंजिनियर बन मुंबई जैसे शहर में विप्रो कंपनी में काम करने लगी तो हौसला बुलंदियों को छुने की ओर अग्रसर हुआ।

तीसरी पुत्री स्वेता कुमारी ने बड़ी दोनों बहनों की नक्शे-कदम पर चलते हुए मणिपुर से इंजीनियरिंग कर जब कंपनी में कदम रखा तो हर कोई इस मां को आदर्श मां मानने की ओर मजबूर हुआ।

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लेकिन सबसे छोटी पुत्री हेमलता ने बड़ी तीनों बहनों के इंजिनियर बनने की ओर ना जा मेडिकल की ओर रूख अख्तियार किया और अपने दुसरे प्रयास में नीट पास कर इंजिनियर परिवार को डाक्टर परिवार भी कहने को विवश कर दिया।

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चारों बहनों का एक मात्र लाडला भाई वर्तमान में इंटरमिडिएट की पढ़ाई कर रहा है। वह भी सभी बहनों की राह पर चलने की बात कहते हुए आईएएस बनने की बात कह रहा है।

वही जब कोटा से सहरसा वापस पहुंची हेमलता ने अपनी सफलता का पुरा श्रेय मां को देते हुए कही कि सफलता परिश्रम व परिवार सपोर्ट से मिलता है। मामा सोनवर्षा राज प्रखंड के मैना गांव निवासी लक्ष्मी यादव के पुत्र आशुतोष आनंद के मार्गदर्शन में लक्ष्य आसान होने की बात कही।