जोगिया शरीफ के गोसीया जामा मस्जिद में रमजान पहले जुमे की नमाज अदा की गई

खगड़िया डेस्क रिपोर्ट : जिले के विभिन्न हिस्सों सहित अलौली प्रखंड के जोगिया शरीफ के गोसीया जामा मस्जिद में रमजान के पाक महीने की पहले जुमें की नवाज अदा की गई। इस नवाज में क्षेत्र से बड़ी संख्या में रोजेदारों ने सिरकत की।

वहीं ख़ानक़ाह फरिदीया जोगिया शरीफ की ओर से जारी बयान में मुस्लिम धर्म गुरू मौलाना बाबू मोहम्मद सिबतैन फरिदी ने कहा कि रमजान माह में जन्नत के दरवजे खोल दियें जातें है। रमजान शरीफ की फजीलत के बारे में विस्तार से जानकारियां दी।

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उन्होंने कहा कि 1979 के बाद इस बार लगभग 15 घण्टें कुछ मिनट का 40 साल के बाद सबसें लम्बा रोजा मुस्लमानों को रखना पड़ेगा। चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी में रोजेदारों को प्यास की सिद्दत महसूस होगी पर इसके बाद भी मजहब-ए-इस्लाम के माननें वालें इन चीजों से दूर रहकर भी अपनें रोजे पूरें करेगें।

उन्होने बताया कि यदि रोजदार पांचो वक्त की नमाजें- फजर जोहर, असर, मगरिब, इशा और कुरान की तिलाबत करें और अपनें रोजे का पूरा दिन अल्लाह और उसके रसूल अलैहिससलाम के जिक्र (याद) में गुजारेगें तो उन्हें भूख व प्यास का अहसास भी नहीं होगा।

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रमजान के महीनें में एक नेकी करनें के बदलें सत्तर नेकियों का सबाब मिलता है। रोजा रखना फर्ज है। अगर किसी बड़ी बीमारी या कोई और सबब से कोई रोजा न रख सकें तो एक रोजे के बदलें लगातार 60 रोजे रखना होगा। यदि उस व्यक्ति मे 60 रोजे रखनें की ताकत नहीं तो वह 60 मिसकीन गरीब मोहताज को भर पेट दोनों समय खाना खिलाएंगे।

जो लोग जान-बूझकर रोजा नहीं रखतें है। तो वह लोग सख्त गुनहगार होगें और उनका मुस्लिम समाज से बायकाट किया जायेगा। रमजान में जन्नत के दरवाजें खोल दियें जातें है और नर्क (जहन्नम) के दरवाजें बन्द कर दियें जातें है। और शैयातीन को भी पूरें माह कैद कर दिया जाता है।

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कलमा, नमाज रोजा, हज, जकात पर मुस्लमानों को अमल करना चाहिए। रमजान माह में खुल्लम-खुल्ला खानें वालों को परहेज करना चाहिए। रोजे की हालत में इंजेक्शन लगवाना, सुर्मा लगाना, सर में तेल डालनें से रोजा नहीं टूटता है।

लेकिन टूथपेस्ट और मंजन के बारीक हिस्सें हलक से उतर गयें तो रोजा टूट जायेंगा। इसलिए यह चीजे रोजे की हालत में मना है। उन्होनें आला हजरत की तहरीरकर्दा किताब फताब-ए-रजवियां के हवाले से बताया कि खैनी, तम्बाकू, गुल करने से भी रोजा टूट जाता है।

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उन्होेने बताया कि जो मुसलमान साहिवे निसाब है। यानी जिनकें पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी या उसके बराबर रकम हो तो उसकी उसकी ढ़ाई प्रतिशत जकात निकालना फर्ज है। इस वक्त साढ़ें वावन तोला चांदी का मूल्य लगभग 20 हजार पांच सौ रुपए है, और अगर जकात नही निकाली तो गुनाहगार होगें ।

उन्होनें मुस्लमानों से रमजान माह में अपील की है कि यतीमों गरीबों फकीरों की मदद करना चाहिए। क्यों इस माह में एक नेकी के बदलें 70 नेकियों का सबाब मिलता है। वहीं उन्होंने मुल्क में अमनों-अमान की दुआ मांगी।