👉पुलिसिया आधुनिकीकरण के बीच खत्म हो गई है वर्षो पूर्व की यह परंपरा


👉पीढ़ी दर पीढ़ी की चौकिदारी प्रथा अब भी है पुलिस विभाग में कायम 


सहरसा से ✍️ ब्रजेश भारती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :-


गांव के नये लोग तो जानते भी नहीं है कि रातों में ‘जागते रहो’ की आवाज कभी गूंजती थी। पुराने लोग अभी भी आस लगाये है कि अंधेरी रातों में कब गूंजेगी ‘जागते रहो’ की आवाज। 


गांव की गलियों के अंधेरी रातों में वर्षो पूर्व से गुंजती आ रही चौकिदारो की आवाज जागते रहो की परंपरा अब बीते दिनों की बात रह गई। पुलिसिया आधुनिकीकरण के बीच चौकिदारों के कार्य भी अब बदल गए हैं। थाना,ओपी में मुंशीगिरी के अलावे थाना के बाबूओं व अफसरों की चाकरी से लेकर डाकिया के कार्य से लेकर पोस्टमार्टम तक कराने में इनका प्रयोग हो रहा है।

इस बीच बदलते कार्यशैली की बजह से जहां गांवों की गलियों से यह परंपरागत आवाज गुम हो गई वहीं छोटी मोटी चोरी से लेकर बड़ी चोरी की घटनाओं में वृद्धि देखी जा सकती है। 


इससे भी हद तो यह कि अब थाना क्षेत्र में कार्यरत चौकीदार व दफादार अपनी पुरानी पहचान की भाषा ‘जागते रहो’ की आवाज को भी भूल चुके हैं? अब चौकीदारों और दफादारों की जुबान पर रहता है जी हुजूर-जी मेम साहब। 


यह स्पष्ट है कि जब से चौकीदारों को सरकारी सेवक घोषित किया गया, उसकी कार्यशैली में ही परिवर्तन आ गया है। पहले चौकीदार गांव में ही काम करते थे लेकिन अब चौकीदारों का काम थाना से लेकर शहर की सड़कों और कार्यालयों के साथ-साथ साहब के आवास पर सीमित हो गया है। नतीजतन अपना काम चौकीदार भूल चुके हैं।

उदाहरण स्वरुप बनमा ओपी में मुंशीगिरी करते एक चौकिदार

चौकीदार द्वारा सजग रहने के लिए रात्रि में जो हथकंडे अपनाये जाते थे। अब शायद ही कहीं देखने को मिलते हैं। पहले जब पुलिस तंत्र उतनी विकसित नहीं थी, तब लोग पुलिस के नाम से भय खाते थे और ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे छोटे कर्मी चौकीदार की भी काफी इज्जत थी। गांव की गलियों व मुहल्लों में बड़े बुजुर्ग का नाम लेकर रामू भइया, मोहन काका जागते रहे की आवाज चौकीदार द्वारा लगायी जाती थी। इस आवाज को सुनकर लोग सजग रहते थे तथा समय की भी जानकारी हो जाती थी। 


स्थानीय चौकीदार को समाज के हर वर्ग के बारे मे निश्चित जानकारी होती थी और वे समाज के हर गतिविधियों पर ध्यान रखते थे। गांव में किसी भी नये आदमी का प्रवेश किसके यहां हो रहा है और कहां क्या हो रहा है इसकी जानकारी चौकीदारों द्वारा थानाध्यक्ष को उपलब्ध कराया जाता था। 

थानाध्यक्ष को इससे प्राप्त सूचना से कानून व्यवस्था बनाये रखने में काफी मदद मिलती थी। लेकिन अब वक्त के साथ-साथ चौकीदारों की भी भूमिका बदल गयी है। हालांकि पुलिस विभाग में पीढ़ी दर पीढ़ी चौकिदारी की परंपरा अभी भी कायम है। सरकारी कर्मी बनने के बाद भी रिटायर्ड होने के बाद उसके उत्तराधिकारी के रूप में उसके दुसरे पीढ़ी पुनः उसके स्थान को भरते नजर आते हैं।